लीवर सिरोसिस से पीड़ित थे प्रणव पांडे
४७ वर्षीय प्रणव पांडे का पूरा परिवार उनकी अंतिम सासें गिनने पर मजबूर हो गया था, लिवर पूरी तरह जवाब दे गया था। हर आधे घंटे में बीमारी के नए-नए लक्षण दिख रहे थे। हैदराबाद के डाक्टरों ने सलाह दी कि किसी नजदीकी रिश्तेदार के लिवर का ट्रांसप्लांटेशन ही श्री पांडे की जान बचा सकता है। श्री पांडे के 20 वर्षीय पुत्र अक्षत पांडे ने पिता को जिंदगी देने अपना जिगर दे दिया। अब श्री पांडे पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन वे कहते हैं, मैंने बेटे को जन्म दिया, पर बेटे ने मुझे जिंदगी दी है। गायत्री नगर स्थित पिंक सिटी निवासी श्री पांडे लिवर सिरोसिस से पीड़ित हैं, यह बात उन्हें तब पता चला, जब उन्होंने हैदराबाद में एआईजी मेडिकल इंस्टीट्यूट में जांच कराई, हालांकि इससे पहले स्थानीय डाक्टरों ने भी उनके लक्षण के आधार पर जांच-पड़ताल कर उपचार की सलाह दी थी। हैदराबाद के डा। डी नागेश्वर रेड्डी से जब उन्हें परामर्श मिला, तब उनकी बीमारी 70 फीसदी को पार कर चुकी थी। एक ही उपाय बाकी था, चेन्नई स्थित ग्लोबल हेल्थ सिटी नामक अस्पताल में लिवर ट्रांसप्लांटेशन कराई जाए। श्री पांडे की पत्नी रत्ना पांडे, बहन शिखा व शिप्रा बताती हैं, जब अक्षत के लिवर को ट्रांसप्लांट के लिए फीट पाया गया, तो वह सहर्ष तैयार हुआ। उसके चेहरे पर न डर था, न संभावित दर्द के अहसास को लेकर शिकन। तीन माह के उपचार के बाद वे अब रायपुर लौट गए हैं। अपना जिगर देकर पिता की जान बचाने वाले अक्षत कहते हैं, मैंने कोई बड़ा काम नहीं किया, सिर्फ अपना फर्ज पूरा किया। ऐसा काम हर संतान को करना चाहिए। वे कहते हैं, इस पूरे उपचार में केवल मेरा नहीं, बल्कि चेन्नई के डा. मोहम्मद रैला, डा. जॉय वर्गीश, डा. वेणुगोपालन, डा. विवेकानंदन और डा. गोमती नरसिम्हन आदि का भी उतना ही योगदान हैं। लिवर ट्रांसप्लांटेशन यूं ही नहीं होता, बल्कि राज्य सरकार से एनओसी लेने के बाद ही डाक्टर ट्रांसप्लांट करते हैं। वे बताते हैं, मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह, पर्यटन व संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का भी इस उपचार में अमूल्य योगदान है। सावधान रहेंश्री पांडे ने तकरीबन 55 लाख रुपए खर्च किए, पुत्र ने लिवर दिया, रायपुर से हैदराबाद-चेन्नई आदि का और उपचार सफल हुआ, यह सुखद पहलू है, लेकिन इस मामले का सोचनीय पहलू यह भी है कि इस खतरनाक और खर्चिला बीमारी की नौबत आने से कैसे बचें। सामाजिक कार्यकर्ता विश्वजीत मित्रा कहते हैं, शराब का अत्यधिक सेवन करने वालों को इस बीमारी के होने की आशंका ज्यादा होती है। इसके अलावा लिवर को प्रभावित करने वाला कोई भी काम लिवर सिरोसिस का कारक हो सकता है। वे कहते हैं, स्थानीय स्तर पर न तो इसके उपचार की कोई व्यवस्था है, न ही मध्यमवर्ग की पहुंच में है, इसलिए सावधानी जरूरी है।

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