रविवार, 5 सितम्बर 2010

बस्तर के युवाओं को लुभाने नया तरीका ईजाद किया


नक्सलियों का नया हथियार नेपाली सेक्स बम
धनवेंद्र जायसवाल
स्तर में पुलिस व अर्धसैनिक बलों के बढ़ते दबाव में साथियों के टूटने की आशंका से निपटने के लिए नक्सलियों ने नेपाल पूर्वोत्तर भारत की लड़कियों को हथिया के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। बस्तर में इन दिनों हथियारबंद नक्सलियों के साथ पहाड़ी इलाके की लड़कियां दिखाई दे रहीं हैं। इनका इस्तेमाल स्थानीय युवाओं को आकर्षित करने में किया जा रहा है। इनके छापामार युद्ध में भी पारंगत होने की खबर है।
बस्तर संभाग में नक्सलवाद का सफाया करने के लिए पुलिस व अर्धसैनिक बलों का संयुक्त अभियान शुरू होने से माओवादी भारी दबाव में हैं। राज्य सरकार का आकर्षक पुनर्वास पैकेज और लगातार मुठभेड़ों की संख्या व दबाव बढ़ने से स्थानीय नक्सली टूटने लगे हैं। बस्तर में माओवाद की कमान सम्हाल रहे आंध्र प्रदेश के नक्सली नेताओं को इसकी वजह से अपना वजूद बचाए रखने के लिए नए नए तरीके ईजाद करने पड़ रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही नक्सलियों ने बस्तर के हर परिवार से एक एक सदस्य देने का फरमान जारी किया था। उनके इस फरमान का ग्रामीणों पर ज्यादा असर नहीं हुआ, उल्टे उनके संगठन के पुराने स्थानीय साथियों के टूटने की खबरें लगातार आ रहीं हैं। इससे निपटने के लिए नक्सलियों ने युवतियों को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
जानकारी के अनुसार इस समय बस्तर में बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर राज्यों व नेपाल की कुछ वर्दीधारी व कुछ जींस टी शर्टधारी युवतियों को बस्तर में हथियारबंद नक्सली दस्तों के साथ घूमते हुए देखा जा रहा है। दरभा ब्लाक के कोलेंग, बेंगपाल, साउथनार, बाड़नपाल, चिंतलनार, व उड़ीसा के मातली क्षेत्र में टेमरुपदर के आसपास के गांवों व जंगलों में नेपाल, भूटान व पूर्वोत्तर भारत की युवतियों के नक्सलियों के साथ होने की खबर है। उनके छापामार युद्ध में भी पारंगत होने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि इन युवतियों के यहां ट्रेनर बनकर आने की सूचना है, लेकिन उनका सेक्स बम के रुप में इस्तेमाल होने की कोई खबर नहीं है। वहीं स्थानीय लोगों का दावा है कि नक्सली उनका स्थानीय युवाओं को रिझाने व अपने पुराने साथियों को बांधे रखने में बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं।
नक्सलियों का यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम
युवतियों के नक्सल आंदोलन में सेक्सुअल इस्तेमाल की खबर कोई नई बात नहीं है। कई आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं पुलिस के सामने इसका खुलासा कर चुकीं हैं। लेकिन पूर्वोत्तर भारत की लड़कियों के छत्तीसगढ़ आने के साथ ही बस्तर के युवतियों को दूसरे क्षेत्रों में भेजे जाने की खबर पहली बार सामने आई है। नक्सली संगठन में अब तक आंध्रप्रदेश व स्थानीय युवतियां ही शामिल थीं। अब छत्तीसगढ़ की प्रशिक्षित युवतियों को दूसरे राज्यों में भेजे जाने की खबर है। सूत्र बताते हैं कि सालों से यहां काम कर रही नक्सली युवतियां अचानक गायब हो हई हैं। इससे उनके बाहर भेजे जाने की आशंका है।

'' नेपाल व पूर्वोत्तर भारत की युवतियां व युवक काफी समय से यहां सक्रिय हैं। मैंने प्रशासन को तीन माह पहले ही इस की सूचना देकर अलर्ट कर दिया था। बारिश के बाद पुलिस का आपरेशन तेज होगा तो ये पकड़े जाएंगे और इसकी पुष्टि हो जाएगी।'' - भीमा मंडावी, विधायक, दंतेवाड़ा

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बस्तर में नक्सलियों के साथ गोरखा किस्म के लोगों के देखे जाने की बात पुष्ट हो चुकी है। मदनवाड़ा (राजनांदगांव) की घटना में भी यह बात सामने आई थी, लेकिन स्थानीय युवतियों के बाहर भेजे जाने की पुष्टि नहीं हो रही है।'' - सुंदरराज पी, एसपी, बस्तर

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गिरफतार नक्सलियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि मणिपुर के कुछ लोग यहां नक्सली ट्रेनर के रुप में ाकर काम कर रहे हैं। नक्सलियों के सेंट्रल आर्गेनाइजेशन कमेटी (सीओसी) मेंअसम के दो सदस्य थे। पूर्वोत्तर से उनका पुराना संबंध है, लेकिन सेक्स बम के रुप में उनके इस्तेमाल की पुष्टि होना बाकी है। पुलिस इसे लेकर सतर्क है।'' - टीजे लांगकुमेर,आईजी, बस्तर

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नेपाल के माओवादी इस समय फुर्सत में हैं। पुलिस को बस्तर के अलावा उड़ीसा व अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में इस तरह की गतिविधियों का पता लगाना चाहिए। यह गंभीर बात है कि नेपाल के माओवादी यहां तक पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके स्थानीय लोगों को रिझाने के लिए इस्तेमाल की थ्योरी पर मेरा विश्वास नहीं है। यह नक्सलियों की किसी और रणनीति का हिस्सा हो सकता है।'' - अरविंद नेताम, पूर्व केंद्रीय मंत्री