शुक्रवार, 25 जून 2010

सफ़र शो रूम से एमएलए तक का

बर्नार्ड जोसेफ रोड्रिग्स... यह नाम छत्तीसगढ़ की जुबां पर हाल ही में आया है। एंग्लो समुदाय के मनोनीत विधायक के रूप में हाल ही में कुर्सी हासिल करने वाले रोड्रिग्स की पृष्ठभूमि यूं तो सक्रिय राजनीति की नहीं रही है, लेकिन सामाजिक उत्थान के लिए जोरदार जज्बा और जुनून उस युवा में साफ झलकता है। गाड़ियों के शोरूम की नौकरी से विधायक जैसे गरिमामयी पद तक सफर करने वाले रोड्रिग्स के विचार ऊंचे हैं। रोड्रिग्स का कहना है, मुझे आगे ही बढ़ना है, पीछे नहीं पलटना है। पेश है उनसे बातचीत के अंश-
अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताएं..?
मेरा जन्म उड़ीसा के बरगढ़ शहर में हुआ है। काफी सालों से रायपुर में रह रहा हूं। पढ़ाई पूरी करने के बाद कई प्राइवेट संस्थानों में सेवाएं दी हैं। हाल में मैं नेशनल गैरेज में बतौर जनरल मैनेजर काम कर रहा था।
इससे पहले राजनीति में सक्रिय नहीं थे, फिर कैसे..?
मैं शुरू से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप सिंह जूदेव के सानिध्य में रहा हूं। उनके साथ कई रैली, सभाओं में हिस्सा लिया है। अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग भी करता रहा। बाद में युद्धवीर सिंह जी के साथ राजनैतिक गतिविधियों में सक्रिय रहा। कुछ दिनों तक स्व. विजय सिंह ठाकुर के साथ भी रहने का मौका मिला।
कुछ ऐसा संयोग बताइए कि मनोनीत विधायक के रूप में आपका मनोनयन हो गया..?
सच कहूं तो मुझे नहीं मालूम था कि मेरा नाम इसके लिए चल रहा है। मैं सिर्फ अपने काम में व्यस्त था। प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह की कृपा रही कि उन्होंने मेरे नाम पर मुहर लगा दी।
पहले कभी सोचा था कि ऐसा पद मिल जाएगा..?
सोचा नहीं था। हां, सामाजिक उत्थान के लिए बेहतर काम करने का जुनून बचनप से है। यह जरूर सोचता रहा कि अगर ऐसा मौका मिले, तो जज्बे के साथ काम करूं। वह मौका मुझे मिल गया।
सामाजिक उत्थान के लिए किस तरह के काम को प्राथमिकता देंगे..?
गरीबी उन्मूलन और शिक्षा मेरी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर हैं। स्वास्थ्य पर भी काफी काम करने की जरूरत है। हर उस काम को करने की इच्छा है, जिससे सरकार की बेहतर छवि लोगों के बीच जाती है।
खासकर एंग्लो समुदाय के लिए कुछ करने की सोच है..?
मुझे लगता है, शिक्षा एंग्लो समुदाय की आज सबसे बड़ी जरूरत है। इसी दिशा में ज्यादा से ज्यादा काम करने की जरूरत है। वह काम मैं करूंगा। एंग्लो समुदाय का एक भी बच्चा बगैर शिक्षा के नहीं होगा।
एंग्लो समुदाय के लोग काफी बड़े पदों पर हैं, शिक्षा का स्तर भी बेहतर है। आप ऐसा कैसे सोचते हैं..? देखिये, प्रदेश में लगभग 250 परिवार हैं। सबसे ज्यादा बिलासपुर में, फिर रायपुर और थोड़े-बहुत जगदलपुर में हैं। एंग्लो परिवारों को करीब से जानने वालों को पता है कि शिक्षा का स्तर अभी काफी नीचे है, उसे ऊपर लाना है।
शोरूम की नौकरी से सीधे बड़े पद पर आए हैं, कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है..?
अभी तो शुरुआत है। मैं समझता हूँ कि जब आदमी के भीतर काम करने का जुनून होता है, तो कोई भी क्षेत्र उसके लिए नया नहीं होता। वैसे भी मैं तो समाज सेवा करने की सोच रखता ही हूं। मुझे एक बेहतर प्लेटफार्म मिला है।
अपने राजनैतिक कैरियर के लिए आगे क्या करना चाहते हैं..?
शासन और संगठन का जो आदेश होगा, जो जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उन्हें पूरा करेंगे।
सक्रिय राजनीति में नहीं होने के कारण अनुभव की कमी तो नहीं..?
बिल्कुल नहीं, क्योंकि मैं आजीविका के लिए नौकरी जरूर करता रहा, लेकिन शासन-प्रशासन और राजनीति को समझने के लिए अपने मार्गदर्शकों से हमेशा सीख लेता रहा। अपने मार्गदर्शकों का नाम मैं पहले बता ही चुका हूं। और फिर, अनुभव तो आदमी तब हासिल करता है, जब उसे काम करने का अवसर मिलता है। मुझे अवसर मिला है, मैं डटकर काम करूंगा, मेरे पास अनुभव भी आ जाएगा।
विनोद डोंगरे


4 comments:

Sanjeet Tripathi ने कहा…

badhiya batchit, shubhkamnayein

'उदय' ने कहा…

... प्रभावशाली पोस्ट!!!

पंकज मिश्रा ने कहा…

बहुत बढिय़ा साक्षात्कार। आपको बधाई और रोड्रिग्स साहब को समझने का मौका मिला। अच्छी पोस्ट।

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

bahoot badiya hai aap ki post