शुक्रवार, 21 मई 2010

बस्तर के साढ़े पांच सौ गावों में जनगणना नही

नक्सली खौफ का असर
धनवेंद्र जायसवाल
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के लगभग साढ़े पांच सौ गांवों में राष्ट्रीय कार्य जनगणना नहीं कराई जा सकेगी। नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के गांवों में नक्सली खौफ की वजह से प्रशासनिक अमले ने जनगणना करने जाने से इनकार कर दिया है। नारायणपुर जिले के 16 गांवों से प्रगणकों को बिना मकान गणना किए लौटना पड़ा। नक्सलियों ने उन्हें खामियाजा भुगतने की चेतावनी देकर उल्टे पांव लौटा दिया। बीजापुर जिला प्रशासन ने 346 ऐसे गांवों को चिन्हित किया है, जहां जनगणना दलों को भेजना फिलहाल संभव नहीं है।
देश में अगले साल होने वाली जनगणना के लिए प्रथम चरण में 1 मई से मकान गणना का काम चल रहा है। इसी गिने हुए मकानों के आधार पर फरवरी 2011 में जनसंख्या की गणना होगी। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही देश, प्रदेश, जिले व विकासखंड की विकास योजनाएं बनती हैं, लेकिन बस्तर संभाग के करीब साढ़े पांच सौ गांवों में कितने मकान हैं व वहां कितनी आबादी निवास करती है, इसका पता नहीं चल पाएगा। ऐसे में उन गांवों के लिए भविष्य में योजनाएं अनुमान के आधार पर बनेंगी। दरअसल बीजापुर जिले के 346 गांवों में नक्सली खौफ की वजह से सरकारी अमले ने मकान गणना या जनगणना करने जाने से इनकार कर दिया है। वहां के कलेक्टर प्रसन्ना आर. ने बताया कि जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के 183, भोपालपटनम के 70, उसूर के 65 व बीजापुर के 28 गांवों में नक्सल प्रभाव की वजह से जनगणना कराने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन गांवों में जनगणना कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सभी गांवों के लिए टीमें बनाई गई हैं। अगले सप्ताह समीक्षा करके वहां के लिए रणनीति बनाई जाएगी। जहां समस्याएं सामने आई हैं, वहां दूसरी टीमों को भेजकर वेरीफिकेशन कराया जा रहा है।
नारायणपुर जिले के प्रभारी कलेक्टर सीडी जांगड़े ने बताया कि ओरछा विकासखंड के सोलह गांवों में मकान गणना का काम बाधित हो गया है। वहां नक्सलियों ने प्रगणकों को बैरंग लौटा दिया है। अब उन गांवों में फिर से प्रगणकों का दल भेजने की तैयारी की जा रही है। कांकेर कलेक्टर एनके खाखा ने बताया कि अब तक नक्सली खौफ की वजह से मकान गणना बाधित होने की सूचना नहीं है, फिर भी पूरी सतर्कता बरती जा रही है। वे इस समय बस्तर जिले के भी प्रभारी कलेक्टर हैं। उन्होंने वहां भी कोई समस्या नहीं होने का दावा किया है। अपर कलेक्टर फूल सिंह ने बताया कि जिले के सभी घरों में मकान नंबर अंकित किए जा चुके हैं, कहीं भी नक्सल समस्या आड़े नहीं आई है। इधर निचले अमले का कहना है कि करीब पचास गांवों में वास्तविक गणना होने के आसार नहीं हैं, क्योंकि नक्सली खौफ की वजह से सरकारी अमला उन गांवों तक नहीं पहुंच पाएगा।
दंतेवाड़ा जिले में भी कमोबेश यही स्थिति है। वहां के अधिकृत सरकारी आंकड़े तो उपलब्ध नहीं हो पाए, लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि जिले के डेढ़ सौ गांव सरकारी अमले की पहुंच से दूर होंगे। राजनांदगांव जिले के कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने बताया कि मानपुर मोहला क्षेत्र में नक्सल समस्या तो है, लेकिन अभी तक जनगणना कराने में किसी तरह की परेशानी होने की कोई सूचना नहीं है। वहां जरूरत पड़ने पर फोर्स की मदद लेने को कहा गया है।
प्रदेश में सन 2008 में कराए गए विधानसभा चुनाव के दौरान बस्तर संभाग व राजनांदगांव जिले के कुछ मतदान दलों ने नक्सली खौफ की वजह से संबंधित मतदान केंद्रों में जाए बिना ही खुद ही ईवीएम में वोटिंग करके मशीनें जमा करा दी थी। बाद में इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर वहां दूसरी, तीसरी बार मतदान कराना पड़ा था।
पिछले जनगणना में भी नक्सली खौफ के कारण बस्तर संभाग के अलावा जशपुर व सरगुजा जिले में गणना दलों ने फर्जी आंकड़े दर्ज कर रिकार्ड जमा करा दिए थे। बाद में व्यापक अनियमितताएं सामने आने पर इसकी शिकायत रजिस्ट्रार जनरल आॅफ इंडिया से भी की गई थी। इस शिकायत की सरगुजा जिले में जांच कराई गई थी, जिसमें गड़बड़ियों की पुष्टि भी हुई थी। इस बार भी ऐसी गड़बड़ी की आशंका सांसद नंदकुमार साय ने जताते हुए प्रशासन से सतर्कता बरतने का आग्रह किया है।
राज्य की जिम्मेदारी- पिल्लई
राज्य की जनगणना निदेशक रेनू पिल्लई का कहना है कि कानून व्यवस्था से जुड़े मसलों को देखने का काम राज्य के नोडल अधिकारी का है। जनगणना निदेशालय केवल तकनीकी दिक्कतों और स्टेशनरी से जुड़ी समस्याओं को देखता है।
सभी गावों में होगी जनगणना-रामनिवास
जनगणना आयुक्त राम निवास का कहना है कि बस्तर की स्थिति सामान्य नहीं है, वहां जिन गांवों में समस्याएं सामने आ रही हैं, उसके लिए अलग कार्ययोजना बनाई जाएगी। प्रदेश का कोई गांव जनगणना से अछूता नहीं रहेगा। सभी गांवों में जनगणना करा ली जाएगी।